मंत्र जप

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मंत्र जप के नियम और विधि यह आलेख उन सभी के लिए है जो मंत्र की शक्ति तो जानते है पर जप विधि में ध्यान नही दे पाते , मंत्र को कैसे सिद्ध करे और उसका पूर्ण लाभ उठाने के लिए ध्यान से पढ़े मंत्र से जुड़े मुख्य नियम

  1. मंत्र जप के लिए बैठने का आसन : मंत्र को सिद्ध करने के लिए और उसका पूर्ण लाभ उठाने के लिए सबसे पहले सही आसन का चुनाव करे | हमारे ऋषि मुनि सिद्धासन का प्रयोग किया करते थे | इसके अलावा पद्मासन , सुखासन , वीरासन या वज्रासन भी काम में लिया जा सकता है |
  2. समय का चुनाव : मंत्र साधना के लिए आप सही समय चुने | जब आप आलस्य से दूर और वातावरण शांत हो | इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त अर्थात् सूर्योदय से पूर्व का समय उपयुक्त है | संध्या के समय पूजा आरती के बाद भी जप का समय सही माना गया है |
  3. एकाग्रचित ध्यान : मंत्र जप करते समय आपका ध्यान और मन एकाग्रचित होना चाहिए | आपको बिल्कुल भी बाहरी दुनिया में ध्यान नही देना चाहिए | मन दूसरी बातो में ना लगे | जिस देवता का आप मंत्र उच्चारण कर रहे है बस उन्हें रूप का ध्यान करते रहे |
  4. मंत्र जाप दिशा : ध्यान रखे मंत्र का जाप करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए |
  5. माला और आसन नमन : जिस आसन पर आप बैठे हो और जिस माला से जाप करने वाले हो , उन दोनों को मस्तिष्क से लगाकर नमन करे |
  6. माला का चयन : आप जिस देवता के मंत्र का जाप कर रहे है , उनके लिए बताई गयी उस विशेष माला से ही मंत्र जाप करे | शिवजी के लिए रुद्राक्ष की माला तो माँ दुर्गा के रक्त चंदन की माला बताई गयी है | 
  7. माला छिपाकर करे जाप : मंत्र उच्चारण करते समय माला को कपडे की थैली में रखे | माला जाप करते समय कभी ना देखे की कितनी मोती शेष बचे है | इससे अपूर्ण फल मिलता है |
  8. मंत्रो का सही उच्चारण : ध्यान रखे की जैसा मंत्र बताया गया है वो ही उच्चारण आप करे | मंत्र उच्चारण में गलती ना करे |
  9. माला को फेरते समय : माला को फेरते समय दांये हाथ के अंगूठे और मध्यमा अंगुली का प्रयोग करे | माला पूर्ण होने पर सुमेरु को पार नही करे |
  10. एक ही समय : मंत्र जाप जिस समय पर आप कर रहे है अगले दिन उसी समय पर जाप करे

नौ ग्रहों के सरल उपाय ज्योतिष, मैडीकल तथा रत्नों के विशेषज्ञों, ऋषि-मुनियों ने ग्रहों दोषों के निवारण के अनेक उपाय बताए हैं, जो अनुभव में ठीक सिद्ध हुए हैं।
*यदि सूर्य कुप्रभाव दे रहा है तो अपने वजन के बराबर गेहूं किसी रविवार को बहती नदी में बहा देना चाहिए अथवा गुड़ बहते पानी में बहा देना हितकर है। सूर्य के कुप्रभाव को दूर करने के लिए बेलपत्र की जड़ गुलाबी धागे में रविवार को धारण करना लाभप्रद है।
*यदि चंद्र बुरे प्रभाव का हो तो सोमवार को चांदी का दान किया जाए। यदि यह नहीं हो पाता तो सोमवार के दिन खिरनी की जड़ धारण करें।
*मंगल मंदा हो और अच्छा फल न दे रहा हो तो मीठी रोटियां जानवरों को खिलाएं। मंगलवार के दिन मीठा भोजन दान करें या बतासा नदी में बहाएं या अनंतमूल की जड़ लाल डोरे में मंगलवार को धारण करें।
*यदि बुध मंदा है तो साबुत मूंग बुधवार को नदी या बहते पानी में बहाएं या विधारा की जड़ हरे धागे में बुधवार को धारण करें।
*यदि बृहस्पति ग्रह कुफल दे रहा है तो गुरुवार को नाभि या जिह्वा पर केसर लगाएं अथवा केसर का भोजन में सेवन करें अथवा नारंगी या केले की जड़ पीले धागे में वीरवार को धारण करें।
*यदि शुक्र अशुभ फल दे रहा हो तो गाय का दान अथवा पशु आहार का दान करें, पशु आहार को नदी में बहाएं या सरपोंखा की जड़ सफेद धागे में शुक्रवार को धारण करें।
*यदि शनि दोष है तो काला उड़द शनिवार को नदी में बहाएं या शनिवार को तेल का दान करें।
*यदि राहु मंदा है दोषयुक्त है तो वीरवार को मूलियां दान करें अथवा शनिवार के दिन कच्चे कोयले नदी में प्रवाहित करें या नीले डोरे में सफेद चंदन बुधवार को धारण करें।
*केतू के प्रतिकूल होने पर कुत्ते को रोटी दें अथवा अश्वगंधा की जड़ आसमानी रंग के धागे में वीरवार को धारण करें।

नौ ग्रह गायत्री मन्त्र सूर्य गायत्री ॐ आदित्याय च विधमहे प्रभाकराय धीमहि, तन्नो सूर्य :प्रचोदयात चन्द्र गायत्री ॐ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि, तन्नो सोम प्रचोदयात मंगल गायत्री ॐ अंगारकाय विधमहे शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो भोम :प्रचोदयात बुध गायत्री ॐ सौम्यरुपाय विधमहे वानेशाय च धीमहि, तन्नो सौम्य प्रचोदयात गुरु गायत्री ॐ अन्गिर्साय विधमहे दिव्यदेहाय धीमहि, जीव: प्रचोदयात शुक्र गायत्री ॐ भ्रगुजाय विधमहे दिव्यदेहाय, तन्नो शुक्र:प्रचोदयात शनि गायत्री ॐ भग्भवाय विधमहे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो सौरी:प्रचोदयात राहू गायत्री ॐ शिरोरुपाय विधमहे अमृतेशाय धीमहि, तन्नो राहू:प्रचोदयात केतु गायत्री ॐ पद्म्पुत्राय विधमहे अम्रितेसाय धीमहि तन्नो केतु: प्रचोदयात

सभी ग्रहों के लिए अलग अलग बीज मंत्र और जाप विधि

सूर्य :

  • बीज मंत्र : ॐ ह्रीं हौं सूर्याय नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ घृणि: सूर्याय नम:।।

चन्द्र :

  • बीज मंत्र : ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।। ।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ सों सोमाय नम:।। ।।

मंगल :

  • बीज मंत्र : ॐ हूं श्रीं भौमाय नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ अं अंङ्गारकाय नम:।।

बुध :

  • बीज मंत्र : ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ बुं बुधाय नम:।।

गुरु :

  • बीज मंत्र : ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।

शुक्र :

  • बीज मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ शुं शुक्राय नम:।।

शनि :

  • बीज मंत्र : ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ शं शनैश्चराय नम:।।

राहू :

  • बीज मंत्र : ॐ ऐं ह्रीं राहवे नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ रां राहवे नम:।।

केतु :

  • बीज मंत्र : ॐ ह्रीं ऐं केतवे नम:।।
  • तांत्रिक मंत्र : ॐ कें केतवे नम:।।
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Gyanchand Bundiwal
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